राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) जल्द ही कई नए कोर्स शुरू करेगा। स्कूल ऑफ इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी में एक आईटी क्षेत्र की निजी कंपनी की मदद से कंप्यूटर साइंस एवं बिजनेस सिस्टम में बीटेक कोर्स शुरू किया जाएगा। इसके अलावा स्कूल ऑफ फार्मेसी विभाग के जरिए बी.फार्मा कोर्स शुरू किया जाएगा। साथ ही फार्मेसी, बायो टेक्नोलॉजी एवं इनवायरमेंट साइंस विभाग के तहत औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कंपनियों से एमओयू किए जाएंगे। इस तरह के कई महत्वपूर्ण निर्णय मंगलवार को आरजीपीवी के कुलपति प्रो. सुनील कुमार की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक में लिए गए। बैठक में यह भी तय किया गया कि विवि हर साल 20 रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए 1 करोड़ की राशि एजुकेशन ग्रांट के तौर पर देगा। यह सुविधा विवि एवं संबंद्ध संस्थानों के लिए होगी। राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी प्रतियोगिताओं में सहभागिता करने वाली टीमों को विवि 50 हजार की सहायता राशि प्रदान करेगा।
दिव्यांगों के लिए लाइब्रेरी सेंटर व विभागों में लगेंगी लिफ्ट
- विश्वविद्यालय की कॅरियर एडवांस स्कीम के तहत यूआईटी आरजीपीवी के 16 प्रोफेसरों को असिस्टेंट प्रोफेसर से पदोन्नत कर एसोसिएट प्रोफेसर बनाया जाएगा।
- ई-व्हीकल इंडस्ट्री 4.0 के क्षेत्र में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मोड पर लैब स्थापित की जाएगी। इससे रिसर्च करने वालों को फायदा मिलेगा
- विश्वविद्यालय एवं संबद्ध संस्थानों के शिक्षकों कों अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विदेश जाने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस एवं हवाई यात्रा का 50 फीसदी किराया दिया जाएगा।
- यूजीसी के निर्देशानुसार दिव्यांगों के लिए बैरियर फ्री इनवायरमेंट के लिए लाइब्रेरी नॉलेज सेंटर एवं एकेडमिक विभागों में लिफ्ट लगाई जाएंगी।
प्रतिनियुक्ति विषय का एजेंडा बैठक में शामिल नहीं
कुलपति प्रो. कुमार ने सदस्यों को जानकारी दी कि प्रतिनियुक्ति के माध्यम से शहडोल, झाबुआ व शिवपुरी में नियुक्ति दी जाएगी, उन्हें इन इंस्टीट्यूट में स्टाफ की जरूरत है, इसलिए यह प्रक्रिया आयोजित की जा रही है। खास बात यह है कि राजभवन ने इस मामले में संज्ञान लिया है। विवि ने बैठक शुरू होने से पहले जवाब भेज दिया था कि प्रतिनियुक्ति का विषय एजेंडा में शामिल नहीं है।
बैठक में 20 करोड़ रुपए के घाटे का बजट भी पेश
बैठक में बीस करोड़ के घाटे का बजट भी पेश किया गया। इसे सभी की सहमति से मंजूरी मिल गई। विदिशा के एसएटीआई के प्रोफेसरों को प्रतिनियुक्ति पर विश्वविद्यालय के यूआईटी में आने पर तो सहमति नहीं मिली, लेकिन शहडोल, झाबुआ के इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए सहमति मिल गई।